हास्य से भरी कवि की मृत्यु शैया | good morning thought | Death bed of poet filled with smile

हास्य व्यंग्य के अद्भुत दृश्यों को आज समझते हैं,आप मस्त ठहाकों के साथ
कवि की मृत्यु शैय्या का वर्णन पढ़ ,हंसते-हंसते लोट-पोट हो जाएंगे,
आइये आपको हंसी से मस्त कर देने वाली कवि की मृत्यु शैय्या के दृश्य पर  बनी कविता की तरफ लेे चलते हैंं-

एक कवि कहता है कि-

कल मैंने सुना कि मैं मर गया,
हाय में कैसे मर गया।

अब लोग भी कह रहे थे, अच्छा था बेचारा
चारपाई पर ही पसर गया,
हाय में कैसे मर गया।।

आइये इस घटना का मनमोहक दृश्य खींचते हैं।

एक वृद्ध बोले-
इसका पोस्टमार्टम करवाओ,
इसका म्रत्यु प्रमाण पत्र बनवाओ,
क्योंकि कवि कभी भी,शीघ्र नहीं मरते हैं,
क्योंकि इनसे तो यमराज भी डरते हैं।
जब कभी कोई कवि मरा है,
उसने यमराज को ही छकाया है।
घंटों अपने पास बिठाया है।
सुन लीजिए,एक कविता की बात नहीं,
पूरा काव्य ग्रंथ यमराज को सुनाया है।
अब यमराज भी कवियों से बहुत घवराता है।
और कोई कवि शीघ्र ऊपर ही नहीं जाता है,

अब आगे देखिए,यह व्रद्ध, कवि की तुलना कैसे करते हैं-

इसका भी क्या भरोसा,
यह भी दे सकता है धोखा।
मेरी बात मान जाओ,
इसे चिकित्सालय पहुंचाओ।
मृत्यु प्रमाण पत्र इसका बनबाओ,

ध्यान देना , मित्रों आगे का वर्णन और शानदार होने जा रहा है।

अब मुझे चिकित्सालय पहुँचाया गया,
मुर्दाघर में लेटाया गया।
एक नर्स आई उसने चादर हटाई,
मेरी आँख की पुतली पिचकाई।
बोली हाय कवि इतने सुन्दर होते हैं,
मैने सुना था छछुन्दर होते हैं।
दिल पर हाथ रखा,कहा सांस तो जा रहा है
हाथ हटाया मैंने कहा रहने दे
मजा आ रहा है।

उसने गाऊन हटाया,
पेट पर चीरा लगाया।
जलिम मरने तो देती ,
उसने कहा कौन बोला –
मेने कहा – वही जिसका तूने पेट खोला।
खैर परिस्थिती में बदलाब हुआ,वहां जो डाक्टर आया,
मुझे उल्टा सीधा किया।
नर्स से ब्लेड लिया ,
दिल चीर दिया।

अन्दर से आवाज आई,
कवि का दिल है साहब अभी अभी तो नर्स पे आया है।
तूने कहां बीच में बलेड फंसाया है।
खैर उसने विधिवत पोस्टमार्टम किया,
प्रथम दृष्ट्या प्रमाण पत्र दिया।
इसके हलक में शायद कविता अड़ गयी है,
तभी इसकी काया पीली पड़ गयी है।

आइये फिर से दृश्य से जुड़ें,अब डॉक्टर की बात सुनिएगा पुनः दृश्य मजेदार निर्मित हो रहा है।

24 घंटे तक इसे बर्फ की सिला पर लिटाये रखो,
उस पर नज़रें गढाये रखो।
नहीं उठा तो मेरे पास आना और प्रमाणपत्र ले जाना।
समस्या गंभीर थी,
जनता मेरा परिणाम जानने को अधीर थी।
24 घंटे बीते,
मृत्यु प्रमाण पत्र मिल गया।
अब लोगों का बेचैन चेहरा खिल गया,

मुझे गौशाला में लिटाया गया।
बैलगाड़ी भर भर लोगों को,
मेरे दर्शन के लिये लाया गया।
रंग बिरंगे फूलों से मैं लद हो गया,
लोगों का स्नेह देख गदगद हो गया।

आगे नेताओं की सहानभूति की लहर से जुड़ते हैं,जिसमे कुछ साहित्यकार भी कुछ कहते हैं –

प्रधानमंत्री ने अमेरिका से दूरदर्शन पर कहा,
महान कवि के निधन की हमें पूरी अनुभूति है।
इस कवि के परिवार से पूरी सहानुभूति है,
हे ईश्वर ! काश ये किसी दुर्घटना में मरा होता।
घर बालों का लाख रुपय तो खरा होता,
कृषि मंत्री भी बोल पड़ा, बह कृषि का महान ज्ञाता था।
कविताओं के बीज बोता था, और भूख को उगाता था।।

इसी बीच एक बड़े सहित्यकार ने कहा–
सहित्य जगत से आज एक सितारा लुप्त हो गया,
उसके जाने से सहित्य रोगमुक्त हो गया।
एक नेता ने कहा वह पूरा राजनेता था,
विपक्ष की रैली को कविता सुनाकर भगा देता था।

अब देखिये कैसे एक कवि को श्मशान तक लेजाने के लिए तैयार किया जा रहा है,ठहाके और मुस्कुराहट को बनाये रखियेगा।

उधर मुझे शमशान ले जाने की तैयारी की गयी,
दूध गंगाजल से नहलाया गया।
चंदन की लेप दी गयी,
इसी बीच एक सीनियर कवि बोले,
लाश को अच्छी तरह सजाओ।
सारी उम्र फटेहाल रहा है,
आज पैंट कोट पहनाओ।
मुझे नया सूट पहनाया गया,
दूल्हे की तरह सजाया गया।
चार लोगों ने अर्थी को उठाया,

एक ने नारा लगाया राम नाम सत है।
बाकी तीनों बोले साला भारी बहुत है,
लगता है बदहजमी से मरा है।
देखो तो पेट पानी से भरा है,
जरा सा हिलता है पानी उगलता है।
पता नहीं कैसे जीता था,
रोटी नहीं मिलती थी पानी ही पीता था।
कम से कम हमारा ख्याल तो करता,
मरना ही था तो शमशान में आकर मरता।
कारवां आगे बढ़ता गया,
मैं उनके कंधों में गढ़ता गया ।

सावधान कवि को श्मशान लिजाते वक्त का प्रसंग सुन आप पाठक की मुस्कुराहट बढ़ने वाली है।

वह दृश्य देखने लायक था,
मानो शूटिंग हो रही थी और मैं नायक था।
लोग क्या मचल रहे थे,
लोग तो लोग साथ ही कुत्ते भी चल रहे थे।
दो कुत्ते तीसरे से कहने लगे,
उनकी आँखों से आँसु बहने लगे।
यार स्टेज पर क्या गुर्राता था,
राम कसम मजा आ जाता था।
पर इसकी कविता लोगों को नहीं भायी,
सिर्फ हम कुत्तों की समझ में आयी।
क्यूँकि वह हमारी तरह भोंकता था,
वे सिर पैर की झोंकता था।
हम उसके आगे पीछे दुम हिलाते थे,
खाली हाल में सोफों पर बैठ जाते थे।
तब एक भूखा दूसरे भूखों को कविता सुनाता था,
और पूरा हाल भूख में डूव जाता था।

कवि की अर्थी का कारवां देख आपके मानस ने गुद गुदी आने लगेगी,वह ध्यान से पढिये –

कारवां कुछ आगे निकला,
पीछे बाले का पैर फिसला।
बैलेंस डगमगा गया,
मैं सीधा नीचे आ गया।
हांडी बाले ने नारा लगाया रामनाम सत है,
अर्थी वाले बोले।
अब नही उठता हमारी तो बस है,
अर्थी टूट गयी थी।
उठाने बालों की हिम्मत छूट गयी थी,
किसी ने पैर पकड़े किसी ने सिर थामा।
लगने लगा डाँस ड्रामा,
एक जिग्री की आँखो़ मे आँसू आ गये ।
मेरी दशा देख वो भन्ना गये,
बोले दुष्टो ढंग से उठाओ।
सारी उम्र घिस्टा है,अब घसीट कर मत ले जाओ,
किसी ने राम नाम का नारा लगाया,
मुझे शमशान पर ला टिकाया।
चिता पर लिटा दिया ,
शुरु हुई शमशान क्रिया।
एक लंगोटिये ने आवाज़ लगाई,
अब मत मिलना भाई,
फिर चिता को आग दिखा दी।

मुझे देख गीली लकडी़ मुस्करा दी,
बोली पर्यावरण पर कविता कहता था।
आज पर्यावरण को प्रदूषित करता है,
जल्दी आग नही पकड़ता।
धुआं उगलता है,

आइये कविता का अंतिम दृश्य खींचता हूँ
एक युवा कवि इस दृश्य को देखकर क्या कहता है इसके बारे में बताता हूँ।

एक युवा कम्प्यूटर कवि बोला।
क्यों काम बढाते हो,
बार बार आग दिखाते हो।
पुराने रिवाज तोड़ दो,
इसे पास की नदी में छोड दो।
मैं चिता पर लेटा कविता संजो रहा था,
कवियों की दूरदृष्टी देख खुश हो रहा था।
चिता छोड भागना चाहता था,
ठण्डी चिता को त्यागना चाहता था।
पर मृत्यु प्रमाण पत्र लोगों के पास था,
और मैं मर गया हूँ मुझे अहसास था।

इस तरह कविता पूरी हुई,आशा है आज की शुभ प्रभात आपकी ठहाकों,और मुस्कुराहटों से भरी हुई।

Click here :- आइये मुस्कुराइए इस गहरे राज को जरूर अपनाइए,पढ़कर मस्त हो जाइए।

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