Friday, January 27, 2023

रपटा घाट और संगम घाट में लगी भारी संख्या में भीड़

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भारतीय धर्म शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य कन्या राशि में आते हैं, तब परलोक से पितृ अपने स्वजनों के पास आ जाते हैं। श्राद्ध तर्पण द्वारा पितृ को बहुत प्रसन्नता एवं संतुष्टि मिलती है। इस बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश शास्त्री का कहना है कि पितृगण प्रसन्न होकर दीर्घायु संतान सुख, धन-धान्य, विद्या, राज सुख, यश-कीर्ति, पुष्टि, शक्ति स्वर्ग एवं मोक्ष तक प्रदान करते हैं। भारतीय धर्म शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य कन्या राशि में आते हैं, तब परलोक से पित्र अपने स्वजनों के पास आ जाते हैं। यही कारण है कि नर्मदा तटों में पितृपक्ष में श्रद्धालुओं की भीड़ लग रही। संगम घाट, रपटा घाट (rapta ghat ) सहित सभी नर्मदा घाटों में श्रद्धालु तर्पण देने पहुंचे। रपटा घाट एवं संगम घाट महाराजपुर में आसपास जिले के भी श्रद्धालु पहुंचे। रपटा घाट में अंतिम दिन पितरों की संख्या अधिक रही।





Srd news के मण्डला समूह की तरफ से
पितरों को नमन





वो कल थे तो आज हम हैं
उनके ही तो अंश हम हैं..





जीवन मिला उन्हीं से
उनके कृतज्ञ हम हैं..





सदियों से चलती आयी
श्रंखला की कड़ी हम हैं..





गुण धर्म उनके ही दिये
उनके प्रतीक हम हैं..





रीत रिवाज़ उनके हैं दिये
संस्कारों में उनके हम हैं..





देखा नहीं सब पुरखों को
पर उनके ऋणी तो हम हैं..





पाया बहुत उन्हीं से पर
न जान पाते हम हैं..





दिखते नहीं वो हमको
पर उनकी नज़र में हम हैं..





देते सदा आशीष हमको
धन्य उनसे हम हैं..





खुश होते उन्नति से
दुखी होते अवनति से
देते हमें सहारा
उनकी संतान जो हम हैं..





इतने जो दिवस मनाते
मित्रता प्रेम आदि के
पितरों को भी याद कर लें
जिनकी वजह से हम हैं..





आओ नमन कर लें कृतज्ञ हो लें
क्षमा माँग लें आशीष ले लें
पितरों से जो चाहते हमारा भला
उनके जो अंश हम हैं..









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इनका कहना है:-





आचार्य महेंद्र मिश्र जी




योग सम्राट आचार्य महेंद्र मिश्र जी के अनुसार
श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या 17 सितंबर गुरुवार को मनाई गई है। इस दिन तर्पण के साथ पितरों की विदाई की जाएगी। इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है,क्योंकि इस दिन उन मृत लोगों के लिए पिंडदान,श्राद्ध और तर्पण कर्म किए जाते हैं, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती है। अगर किसी कारण से मृत सदस्य का श्राद्ध नहीं कर पाए हैं तो अमावस्या पर श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं। पितृ मोक्ष अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के पिंडदान आदि शुभ कर्म करना चाहिए। मान्यता है कि पितृ पक्ष में सभी पित्र देवता धरती पर अपने कुल के घरों में आते हैं और धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। अमावस्या पर सभी पित्र अपने लोक लौट जाते हैं। जिनकी मृत्यु सौभाग्यवती रहते हुए हो जाती है. वैसे महिलाओं के लिए नवमी तिथि को अहम माना गया है. नवमी की तिथि को विवाहित महिलाओं का श्राद्ध करने का विधान बताया गया है।
आगे वे कहते हैं कि सर्वपितृ अमावस्या को पितरों से क्षमा याचना करते हुए उन्हे विदा करना चाहिए. पितृ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर बिना साबुन लगाए स्नान करें और फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनें. पितरों के तर्पण के निमित्त सात्विक पकवान बनाएं और उनका श्राद्ध करें. पितरों को स्मरण करते हुए जाने अंजाने में किसी भी प्रकार की गलती के लिए क्षमा मांगे और परिवार के सभी सदस्यों पर आर्शीवाद बनाए रखने की प्रार्थाना करें. इस दिन शाम को एक दीपक जलाकर हाथ में रखें और एक कलश में जल लें. इसके बाद घर में चार दीपक जलाकर चौखट पर रखें. इसके बाद पितरों का आभार व्यक्त करें. इसके बाद दीपक को मंदिर में रख दें और जल पीपल के वृक्ष पर चढ़ा दें ।





कोरोना काल मे अपनी सेवाएं देते हुए मृत्यु को प्राप्त पितरों को किया नमन









नर्मदा तट संगम घाट महाराजपुर में पितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर राज्यसभा सदस्य संपतिया उइके ने एक नई पहल की। भारत देश की ओर से लड़ते हुए शहीद हो गए वीर जवानों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व कोरोना काल मे अपनी सेवाएं देते हुए डॉक्टर, नर्स, पुलिस के जो लोग अब नहीं रहे, उनके लिए सर्वधर्म प्रार्थना व उनकी आत्मा की शांति के नर्मदा तट में तर्पण भी किया। राज्यसभा सदस्य संपतिया उइके ने कहा कि यह कोइ राजनितिक विषय की बात नहीं है। यह मेरे दिल से ही आवाज निकली की जिनके कोई नहीं है व देश के जवानों की आत्मा कि शांति के लिए नर्मदा के पवित्र संगमघाट में यह आयोजन किया जाना चाहिए। जिनके अपने है उनका तर्पण तो कोई न कोई कर ही देता है।





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