निर्वाचन आयोग ,वित्त आयोग , लोक सेवा आयोग क्या होते है ?और इनके प्रमुख कार्य क्या है ?

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आइये जानते है भारतीय निर्वाचन आयोग के बारे में ,हम जानेंगे निर्वाचन आयोग की स्थापना दिवस ,निर्वाचन आयोग का गठन ,निर्वाचन आयोग के मुख्य कार्य ,और हम जानेंगे वित्त आयोग एवं लोकसेवा आयोग के बारे में :-

भारतीय निर्वाचन आयोग

चुनाव ,भारतीय लोकतंत्र के मुख्य आधार का निर्माण करते है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324में निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया है जो भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराने वाली शीर्ष संस्था है ताकि चुनाव प्रक्रिया में जनता की भागीदारी को सुनिश्चित किया जा सके। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 में संसद ,राज्य विधानमंडल के साथ राष्ट्रपति ,उपराष्ट्रपति पद के लिय होने वाले चुनाव के अधीक्षण,निर्देशन और निर्वाचन नामावलियो की तैयारी पर नियंत्रण रखने के लिय निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया है।

सर्द न्यूज़ निर्वाचन आयोग ,वित्त आयोग , लोक सेवा आयोग क्या होते है ?और इनके प्रमुख कार्य क्या है ?

  • संविधान के भाग -15 के अनुच्छेद -324 से 329 में निर्वाचन से सम्बंधित उपबंध दिया गया है। 
  • भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी ,1950 को हुई थी। यह एक स्थाई संवैधानिक निकाय है।
  • निर्वाचन आयोग का गठन मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त से किया जाता है ,जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। 
  • मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु ,जो भी पहले हो तब तक होगा। अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु जो पहले हो तब तक रहता है। 
  • मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों को सर्वोच्च न्यायालय  न्यायाधीश के बराबर वेतन (90 हजार रूपये मासिक )एवं भत्ते प्राप्त होंगे। 
  • पहले चुनाव आयोग एक सदस्यीय आयोग था ,परन्तु अक्टूबर ,1993 में तीन सदस्यीय आयोग बना दिया गया। 

निर्वाचन आयोग के मुख्य कार्य क्या है ?

  1. चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन 
  2. मतदाता सूचियों को तैयार करवाना ,
  3. विभिन्न राजनीतिक दलों को मान्यता प्रदान करना 
  4. राजनीतिक दलों को आरक्षित चुनाव चिन्ह प्रदान करना 
  5. चुनाव करवाना 
  6. राजनीतिक दलों के लिए आचार संहिता तैयार करवाना। 

निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता के लिए संवैधानिक प्रावधान 

  • निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है ,अर्थात इसका निर्माण संविधान ने किया है। 
  • मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति करते है। 
  • मुख्य चुनाव आयुक्त को महाभियोग जैसी प्रक्रिया से ही  हटाया जा सकता है। 
  • मुख्य चुनाव आयुक्त का दर्जा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समान ही है। 
  • नियुक्ति के पश्चात मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्तों की सेवा शर्तो में कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। 
  • मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्तों का वेतन भारत की संचित निधि में से दिया जाता है। 

वित्त आयोग 

  • संविधान के अनुच्छेद -280 में वित्त आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। 
  • वित्त आयोग के गठन का अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया है। 
  • वित्त आयोग में राष्ट्र पति द्वारा एक अध्यक्ष एवं चार अन्य सदस्य नियुक्त किये जाते है। 
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद -281 के तहत राष्ट्रपति वित्त आयोग की सिफारिशों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है। 
  • राज्य वित्त आयोग का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद -243 (1 ) के द्वारा किया जाता है। 
  • वित्त आयोग वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। 

वित्त आयोग के प्रमुख कार्य :-

  1. वित्त आयोग के द्वारा संघ एवं राज्यों  के बीच करो की शुद्ध आगमो का वितरण और राज्यों के बीच ऐसे आगमो का आबंटन किया जाता है। 
  2. वित्त आयोग भारत की संचित निधि में से राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान को शासित करने वाले सिध्दांतो के बारे में बताता है। 
  3. राज्य वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर राज्य के नगरपालिकाओं और पंचायतो के संसाधनों की पूर्ती के लिए राज्य की संचित निध के संवर्धन के लिए जरुरी उपाय करता है। 
  4. राष्ट्रपति के द्वारा वित्त आयोग को सुदृण वित्त के हित  में निर्दिष्ट कोई अन्य विषय सोपे जाने पर वित्त आयोग अपनी सलाह देता है। 

लोक सेवा आयोग 

    • भारत में सन 1919 के भारत सरकार अधिनियम के अधीन सर्वप्रथम 1926 में लोक सेवा आयोग की स्थापना की गयी थी। लोक सेवा आयोग की स्थापना के लिए 1924 में विधि आयोग ने सिफारिश की थी।
    • संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। 
    • संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या निर्धारित करने की शक्ति राष्ट्रपति को है। वर्तमान में इसकी संख्या 10 है। 
    • संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति 6 वर्षो के लिए की जाती है। यदि वह 6 वर्षो के अंदर 65 वर्ष की आयु पूरी कर लेता  है तो वह पद से मुक्त हो जाता है।  
    • राज्य लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति राजयपाल के द्वारा की जाती है ,परन्तु इन्हे हटाने का अधिकार राजयपाल को नहीं है। 
    • राज्य लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की उम्र तक होता है। इन दोनों में जो पहले पूरा होता है उसी के तहत वे अवकाश ग्रहण करते है ,परन्तु उन्हें कार्यकाल के बीच उच्चतम न्यायालय के प्रतिवेदन पर तथा कुछ निर्हर्ताओ के होने पर संविधान के अनुच्छेद -317 के अंतर्गत राष्ट्रपति हटा सकते है। 

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