Sunday, January 29, 2023

नव वर्ष ,रोचक जानकारी happy new year 2021

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नव वर्ष ,happy new year

प्रस्तावना – भारत में मनाए जा रहे हैं अंग्रेजी नव वर्ष तब मनाया जाता है जब 1 साल यानी कि 31 दिसंबर चला जाता है । और रात की 12:00 बजे लोग नए साल की खुशी में कई आयोजन ,प्रयोजन करते हैं । और नए वर्ष की शुभकामनाएं देते हैं।
नए साल में पर क्या करें –
आपको यह जानना बहुत जरूरी है कि आप नए साल में क्या करने वाले हैं इससे आने वाला साल सुखमय और मंगलकारी बनता है। और पिछले साल की सभी परेशानियां भी खत्म करता है ।तो सबसे पहले साल के पहले दिन स्नान करके साफ वस्त्र धारण करके पूजा आराधना जरूर करें और अपने इष्ट की अराधना अवश्य करें ।नए साल के पहले दिन आप गरीब व्यक्ति की मदद भी कर सकते हैं । और निर्धन लोगों के बीच में खाने-पीने की चीजें पर बांट सकते हैं । आपके घर में सभी बड़े लोगो के पैर जरूर छुए और उनसे आशीर्वाद ले। नए साल में आप पशु पक्षियों की सेवा भी कर सकते हैं और नए साल के पहले दिन कोई भी नकारात्मक सोच ना लाएं।
नए वर्ष पर लोग एक दूसरे के बीच खुशियां बांटते हैं और नए साल पर एक दूसरे लोगों को पूरे साल मंगलमय और खुशियां आने की शुभकामनाएं देते हैं। इस दिन लोग घर में कई स्वादिष्ट पकवान भी बनाते हैं । कई लोग नए वर्ष पर छूटा हुआ या अधूरा काम को पूरा करने के लिए मन में संकल्प बनाते हैं।

नए वर्ष पर क्या होता है
नए वर्ष पर पूरे विश्व भर में खुशियां मनाई जाती हैं। कई लोग पार्टियां करते हैं । पटाखे जलाए जाते हैं । और टीवी पर नए वर्ष पर प्रोग्राम आयोजित होते हैं साथ ही नए वर्ष पर लोग बाहर घूमने जाते हैं । हालांकि कोरोना महामारी के कारण इस साल नववर्ष थोड़ा फीका होगा । पर आने वाला साल सभी के लिए अच्छा ही होगा।

भारतीयों का नव वर्ष चेत्र मास में – आज के युग में अंग्रेजी कैलेंडर का प्रचलन अत्यधिक सर्वव्यापी हो गया है । किंतु भारत में भारतीय कैलेंडर का महत्व कभी कम नहीं किया जा सकता। हमारे प्रत्येक त्योहार व्रत, उपहास ,युग पुरुषों की जयंती ,पुण्यतिथि, विवाह तथा अन्य शुभ कार्य शुभ मुहूर्त के लिए आदि सभी भारतीय कैलेंडर अर्थात हिंदू पंचांग के अनुसार ही देखे जाते हैं । संपूर्ण विश्व में नव वर्ष 1 जनवरी को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है । यह नूतन वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है । किंतु भारतीय पंचांग के अनुसार नव वर्ष चैत्र मास में मनाया जाता है। इस दिन को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिवस ही वासंती नवरात्र का प्रथम दिवस भी होता है। पुरातन ग्रंथों के अनुसार इसी दिन सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी| चेत्र मास नववर्ष बनाने के लिए सर्वोत्तम है |।क्योंकि चैत्र मास में चारों ओर पुष्प खिलते हैं | और उस पर नए पत्ते आ जाते हैं | जैसे चारों ओर हरियाली और मानव प्रकृति ही नववर्ष मना रही हो । चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है और तथा गर्मी का आगमन होने आ रहा होता है | मनुष्य के लिए यह समय प्रत्येक प्रकार के वस्त्र पहनने के लिए उपयुक्त है | चैत्र मास अर्थात मार्च या अप्रैल में बच्चो का भी परिणाम आता है | जिसमें नया सत्र भी प्रारंभ होता है। 31 मार्च या 1 अप्रैल से ही बैंक या भारत सरकार का बजट भी आता है । चैत्र में नया पंचांग आता है ।जिससे प्रत्येक भारतीय द्वारा पर्व , विवाह तथा अन्य मुहूर्त देखे जाते हैं। चैत्र मास में ही फसल कटती है और नई फसल घर में आ जाती है | तो किसानों का यही नया वर्ष हो जाता है । भारतीय नववर्ष से प्रथम नवरात्र भी होता है । जिससे घर घर में माता रानी की पूजा भी होती है । जो वातावरण को शुद्ध तथा सात्विक बना देता है। चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत की शुरुआत , भगवान झूलेलाल का जन्म ,नवरात्रि प्रारंभ, गुड़ी पड़वा तथा ब्रह्मा के द्वारा सृष्टि की रचना आदि का संबंध इस दिन से ही है | इस प्रकार ब्रब्रह्मांड से प्रारंभ कर सूर्य चंद्र आदि दिशा और मौसम नक्षत्र और पौधों की नई पत्तियां और किसानों की फसल ,विद्यार्थी के नई कक्षा और मनुष्य में नया रक्त संचरण और आदि कई प्रक्रिया चैत्र मास से ही प्रारंभ होती है । हिंदू पंचांग की गणना सूर्य तथा चंद्रमा के अनुसार की जाती है यह सत्य है कि विश्व के अन्य प्रत्येक कैलेंडर किसी ना किसी रूप में भारतीय पंचांग का ही अनुसरण करते हैं |

वर्ष 2020- हालांकि, 2020 कोरोना महामारी के चलते कई लोगों का यह साल शायद ही अच्छा हो । पर आने वाले साल में सब की यही कामना है । कि पूरी सृष्टि हरी भरी हो और सभी जगह शांति स्थापित हो। ताकि हम और आने वाली पीढ़ी सुखमय जीवन व्यतीत कर सकें।

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