Friday, January 27, 2023

डोकलाम विवाद : सिक्किम,भूटान और चीन के बीच सीमा विवाद

Must Read

डोकलाम विवाद :- 2017 में हुआ चीन और भारत के बीच डोकलाम विवाद काफी लंबे समय तक चला था और उस समय भी यह गतिरोध लगभग 4 से 5 महीने चला था और कुछ समय बाद दोनों देशों की सेनाओं ने बॉर्डर से अपनी अपनी सेनाओं को पीछे ले लिया था । लेकिन ऐसा लगता है कि चीन डोकलाम के मुद्दे पर अभी पीछे नहीं हटा है और वह अपनी रणनीति और मजबूत करने पर लगा हुआ है | लेकिन जब हम 2020 में देखते हैं तो कई ऐसी खबरें सामने आती हैं कि चीन डोकलाम से अभी भी नहीं हटा हैं। और चीन अभी भी कई सारे निर्माण जिससे सड़कों का निर्माण मिलट्री बेसेस डोकलाम के आसपास बना रहा है इसके साथ कुछ और खबरें भी आई है जिससे नवंबर 25 2020 को यह खबर आई थी कि डोकलाम के पास चीन ने एक नया गांव बसा दिया है। जब भारत ने इस पर प्रश्न उठाए तो चीन का कहना था कि या गांव पहले से ही बसा हुआ था।

अमेरिका की मेक्ससर कंपनी की सेटेलाइट से यह पता चला है कि पिछले साल नवंबर में यहां कोई घर नहीं था जबकि इस साल नवंबर में यहां कई घर एवं पूरा गांव बसाया गया है | हालांकि, अरुणाचल प्रदेश के सीमा पर भी 3 नए गांव बसाने की भी बात सामने आई थी।

डोकलाम क्षेत्र क्या है और कहां हैं ?

भूटान और चीन के बीच की सीमा 470 किलोमीटर लंबी है। जिसमें से चीन और भूटान के बीच 25 परसेंट सीमा विवादित है।

लगभग 100 साल से एक क्षेत्र जो चीन दावा करता है कि वह उसका क्षेत्र है पर यह क्षेत्र चीन, भूटान और भारत की सीमा पर मौजूद है उसे हम डोकलाम क्षेत्र कहते हैं। जो भूटान के उत्तर पश्चिम क्षेत्र पर स्थित है। सबसे ज्यादा विवादित क्षेत्र जो 495 स्क्वेयर किलोमीटर है जिसमें से jakurlung और pasamlung वैली सबसे विवादित क्षेत्र है।

पर डोकलाम विवाद ज्यादा विवादित रहता है क्योंकि यह भारत की सीमा के करीब है और सबसे महत्वपूर्ण बात की यह  सिलिगुड़ी कॉरिडोर के भी करीब हैं। जिससे चिकन नेक कोरिडोर भी कहा जाता है।और यह  कॉरिडोर भारत को उत्तर पूर्वी क्षेत्र से जोड़े रखता है। और अगर इस पर चीन नजर रखता है तो यह भारत के लिए बड़ी नुकसान की बात होगी। इसलिए डोकलाम का क्षेत्र भारत के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना भूटान के लिए।

डोकलाम विवाद की शुरुआत?

डोकलाम का विवाद वैसे तो काफी पुराना है। लेकिन जब ब्रिटिश शाषन हुआ करता था।तब उनका मुख्य कार्य सिर्फ व्यापार करना था लेकिन भूटान ने ब्रिटिश राज्य को अपने सीमा में आने से रोका  जिससे एंग्लो भूटान वार की शुरुआत हुई । पर इसमें भूटान की हार हुई ।

क्योंकि वहां पहाड़ी इलाका था इसलिए वहां पर ब्रिटिश को रास्ता बनाना पड़ा और जब यह बात तिब्बती लोगों को पहुंची तब उन्होंने चुंबी वैली में ही ब्रिटिशर्स को रोक दिया और वहां पर तिब्बती और ब्रिटिश राज्य के बीच लड़ाई हुई। पर एक संधि के मुताबिक ब्रिटिश ने तिब्बत के लोगों के साथ व्यापार शुरू कर दिया और वहां पर सीमा की विवाद को भी सुलझा दिया और उस संधि का नाम था एंग्लो चाइनीस कन्वेंशन ऑफ 1980 और यही संधि आज तक सिक्किम ,भूटान और चीन के बीच सीमा  चली आ रही है।

पर संधि में सिर्फ सिक्किम, अंग्रेज और तिब्बत के लोग शामिल थे भूटान नहीं। इसलिए चीन का हमेशा यह दावा रहता हैं। की यह क्षेत्र भूटान का नहीं हैं। पर उस समय संधि का सिद्धांत भौगोलिक के अनुसार था ।

चीन की रणनीति:-

शायद ही ऐसा कोई चीन का पड़ोसी देश  है जिसके साथ चीन  की सीमा विवादित का मुद्दा ना रहा हो। क्योंकि चीन की हमेशा यही रणनीति रहती है कि उसका सीमा क्षेत्र हमेशा बढ़ता रहे और जितना क्षेत्र कब्जा हो सके और उस पर डटे रहना हैं। हर मुमकिन प्रयास चीन का हमेशा तैयार रहता है।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -
Latest News

बंद पड़ी खदान में गैस रिसाव से चार लोगों की मौत, कबाड़ चोरी करने घुसे थे

बंद पड़ी खदान में गैस रिसाव से चार लोगों की मौत, कबाड़ चोरी करने घुसे थे मृत लोगों के...
- Advertisement -

More Articles Like This

- Advertisement -