करतारपुर साहिब गलियारा,कारीडोर के बारे में , करतारपुर साहिब धाम ,गुरु नानक देव जी

करतारपुर साहिब गलियारा

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने 26 नवंबर 2018 को गुरदासपुर पंजाब में करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण कार्य की शुरुआत की इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्ष अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की 550 भी जयंती के अवसर पर 22 नवंबर 2018 को इस गलियारे के निर्माण को स्वीकृति दी गई थी भारत सरकार की इस पहल को पाकिस्तान सरकार का भी समर्थन मिला और पाकिस्तान सरकार ने भी 28 नवंबर 2018 को इस गलियारे को पाकिस्तान की सीमा से आगे बढ़ाने के काम की शुरुआत की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा इस बहुप्रतीक्षित गलियारे के निर्माण की नींव भारत सरकार के 2 मंत्रियों हरदीप सिंह पुरी आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और हरसिमरत कौर बादल खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की उपस्थिति में रखी गई अध्याय है कि भारत में सर्वप्रथम वर्ष 1999 में उस समय करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण का प्रस्ताव रखा था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई द्वारा लाहौर की यात्रा पर गए थे पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय बेनजीर भुट्टो ने भी कॉरिडोर के लिए प्रयास किए थे लगभग 6 किलोमीटर लंबे इस गलियारे के पूरा होने से सिक्ख श्रद्धालुओ को पवित्र धाम पहुंचने में काफी सुविधा हो जाएगी यहां जाने के लिए अटारी बॉर्डर से 200 किलोमीटर का सफर सफर तय करना पड़ता है पाकिस्तान में करतारपुर साहिब रावी नदी के पार डेरा बाबा नानक से केवल 4 किलोमीटर दूरी पर है गलियारा शुरू होने पर भारतीयों को वीजा मुक्त आवाजाही की सुविधा मिल सकेगी इसके अलावा मोदी सरकार ने यह भी फैसला किया है कि गुरु नानक देव जी से जुड़े ऐतिहासिक सुल्तानपुर लोधी को भी स्मार्ट सिटी की तर्ज पर एक धरोहर शहर के तौर पर विकसित किया जाएगा इसके पीछे इस शहर को तीर्थ यात्रियों के लिए और आकर्षित बनाने की मंशा है।

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कारीडोर के बारे में

करतारपुर साहिब कारीडोर भारत में पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक प्रस्तावित है पाकिस्तान में यह धाम से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक होगा।अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर फैले इस कॉरिडोर कि भारत में लगभग 2 किमी तथा पाकिस्तान में लगभग 4 किमी लम्बाई होगी रावी नदी पर कारीडोर के हिस्से के रूप में एक पुल प्रस्तावित किया गया है.!करतारपुर गलियारे का कार्य सरकार की सहायता से एक संयुक्त विकास परियोजना के रूप में किया जाएगा ताकि सभी आधुनिक सुविधाओं वाले इस मार्ग से तीर्थयात्री सुगमता और सरलता से आवाजाही कर सकें।
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करतारपुर साहिब धाम

करतारपुर साहिब सिख समुदाय के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है 16वीं शताब्दी में बना यह गुरुद्वारा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में नारोवाल जिले के शकरगढ़ में रावी नदी के किनारे स्थित है.! भारत पाकिस्तान सीमा से तीन-चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गुरुद्वारा का लगभग 500 वर्षों का समृद्ध इतिहास है तथा यह गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक मंदिर से स्पष्ट दिखाई देता है ऐसी मान्यता है कि इसकी स्थापना सिक्खों के प्रथम गुरु नानक देव जी द्वारा 1522 ईस्वी में कराई गई थी इसी स्थान पर नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष व्यतीत किए और इस क्षेत्र में एक सिख समुदाय को संकलित किया करतारपुर साहिब की वर्तमान सफेद इमारत पटियाला के महाराजा सरदार भूपेंद्र सिंह द्वारा बनवाई गई थी इस को वर्ष 1995 में पुनरुद्धार कार्यों के लिए बंद कर दिया गया था इसका पूरा हुआ पवित्र स्थल के बारे में यह भी कहा जाता है कि इस गुरुद्वारे में ही नानक देव जी ने 22 सितंबर 1539 को अंतिम सांस ली थी!
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गुरु नानक देव जी

सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 मैं तलवंडी नामक गांव वर्तमान में (ननकाना साहिब पंजाब पाकिस्तान में स्थित)मैं कार्तिक पूर्णिमा को एक खत्री कुल में हुआ था उनके पिता का नाम कल्याण चंद्र मेहता कालू जी तथा माता का नाम तृप्ता देवी था, इनके अनुयाई इन्हें नानक नानक देव जी बाबा नानक और नानक शाह नामों से संबोधित करते हैं. गुरु नानक देव जी अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक योगी , गृहस्थ ,धर्म सुधारक, समाज सुधारक, कवि , देशभक्त और विश्व बंधु जैसे विशिष्ट गुण समेटे हुए थे गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म के तीन स्तंभ कहे जाने वाले नाम जपना , कीरत करनी और वंद चखना नामक मान्यताओं को औपचारिक रूप से स्थापित किया था. इनका विवाह 16 वर्ष की आयु में सुलक्खनी नामक महिला से हुआ गुरु नानक देव जी ने श्री चंद्र और लखमी दास नानक दो पुत्र भी थे दोनों पुत्रों के नाम लक्ष्मीदास नानक श्री चंद्र दोनों पुत्रों के जन्म के उपरांत गुरु नानक देव जी घर छोड़कर चार साथियों( मर्दाना, लहना ,बाला व रामदास ) के साथ तीर्थ यात्रा के लिए निकल गए थे गुरु नानक देव जी के लेखन कार्य को 974 आध्यात्मिक भजनों के रूप में जिनमें (जपजी साहिब ,आशा दी वर ,बारा माह , सिद्ध गोश्त और दखनी ओमकार शामिल थे)पांचवे गुरु अर्जुन देव जी द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब सिखों का पवित्र ग्रंथ में शामिल किया गया।

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