Friday, January 27, 2023

ऐसी कौनसी नदी, जिसमें छिपा है लंडन इतिहास ढूढ़ रहे है खोया हुआ खजाना

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टेम्स नदी में वह सर्द सुबह थी. पूर्वी लंदन के वेपिंग रेलवे स्टेशन के बाहर आकर बेन गजूर ने जूते बदले. ट्रेनर्स की जगह मैंने रबर के लंबे बूट पहन लिए.





बेन गजूर ने प्लास्टिक के दस्ताने पहनने लगा तो दफ़्तर जाने वाले मुझे घूरकर देखने लगे. एक संकरी गली से होते हुए मैं नदी तक जाने वाली सीढ़ियों पर पहुंच गया.





उन सीढ़ियों की ऊंचाई बराबर नहीं थी इसलिए उन पर सावधानी से उतरना पड़ा. मैं कीचड़ में कुछ खोजने जा रहा था.





अगर आप लंदन के व्यस्त पुलों से नीचे देखें तो पता चलेगा कि टेम्स नदी की ऊंचाई रोज़ाना घटती बढ़ती रहती है. ज्वार के समय नदी में पानी बढ़ता है फिर उतरता है. नदी के जलस्तर में रोज़ाना सात मीटर तक अंतर आता है.





पानी घटने पर कुछ लोग सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं और कीचड़ में तलाश करते हैं. उनको “मडलार्क” कहा जाता है. कीचड़ में छिपे अवशेषों को ढूंढकर वो टेम्स के इतिहास को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं.





यह कार्य अत्यंत ही मुश्किल है





लंदन में टेम्स के किनारे-किनारे चलना सबका शौक नहीं है- ठंडे और गंदे कीचड़ में भला कौन घूमना चाहेगा.





ऐतिहासिक रूप से देखें तो मडलार्क बनना किसी का ख़्वाब नहीं होता. यह शब्द जॉर्जियन और विक्टोरियन काल का है जब टेम्स नदी शहर के अंदर माल ढुलाई का प्रमुख मार्ग हुआ करती थी.





उस समय नदी का पानी बढ़ने पर उसके किनारे मलीन मडलार्क के झुंड जमा हो जाते थे. उनमें ग़रीब महिलाएं और बच्चे ज़्यादा होते थे. नदी का पानी उतरते ही वे कीचड़ में घुस जाते थे.





वे नाव से गिरा कोयला, रस्सी के टुकड़े या कोई भी ऐसी चीज़ उठा लेते थे जो नाविकों की ग़लती से गिर जाते थे.





मडलार्क लंदन में ही मिलते हैं क्योंकि दुनिया में बहुत कम ऐसे बंदरगाह शहर हैं जो लंदन जितने बड़े हों और जहां टेम्स जैसी नदी बहती हो जिसमें उतरकर वे अपना काम कर सकें.









इसके अलावा, टेम्स के कीचड़ में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम है. इससे जैविक चीज़ें सड़ने से बच जाती हैं.





लोगों में शोंक है खोजबीन करने का





कीचड़ में खोजबीन का यह काम पुनर्जागरण के दौर से गुज़र रहा है. टेम्स नदी में उतरकर तलाश करना कभी इतना आसान नहीं था.





टेम्स डिस्कवरी प्रोग्राम से इतिहासकारों और स्वयंसेवकों का एक समूह जुड़ा है जो नदी तट की सैर कराता है.





इससे जुड़े वरिष्ठ सामुदायिक पुरातत्वविद जोश फ्रॉस्ट कहते हैं, “विशेषज्ञ गाइड आपको छिपी हुई पुरातात्विक चीज़ें, जैसे- मछली पकड़ने के सैक्सॉन फंदे और किसी ज़माने में ट्यूडर महल की ओर जाने वाले जेटी दिखाएंगे.”





“वे आपको सुरक्षित रखेंगे और यह भी देखेंगे कि लंदन बंदरगाह प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन न हो.”





इस शौकिया सामुदायिक मडलार्किंग से अलग ज़्यादातर मडलार्क एकाकी जीव होते हैं. अक्सर उनको अपने पैरों के पास पड़े पत्थरों को घूरते हुए देखा जा सकता है.





2019 में सबसे ज़्यादा बिकने वाली किताबों में लारा मैक्लेम की किताब “मडलार्किंग : लॉस्ट एंड फाउंड ऑन द रिवर टेम्स” शामिल थी.





मैक्लेम ने लिखा है, “एक दिन मैं नदी के किनारे सीढ़ियों के ऊपर खड़ी थी और मैंने नीचे जाने का फ़ैसला किया.”





“किसी वजह से मुझे लगता था कि नदी के किनारे जाने की मनाही होती है. कभी-कभी वहां कम पानी होता है, कभी-कभी पानी भरा होता है.”





मैक्लेम बचपन में पुरातत्वविद बनने के सपने देखती थीं. उनको लगता था किसी दिन उनको नदी में छिपा हुआ किंग जॉर्ज का सोने का ख़ज़ाना मिलेगा और वह दौलतमंद बन जाएंगी.





उन्होंने इंटरनेट पर मडलार्किंग के बारे में पढ़ा. वह टेम्स के कीचड़ में उतरीं तो उनका पहला ख़ज़ाना मिला- मिट्टी की टूटी हुई पाइप जिसमें 18वीं सदी में किसी ने धूम्रपान किया होगा.





अब उनको लंदन ब्रिज के नीचे रोमन बर्तनों की खोज करते, रोदरहाइथ में औद्योगिक अवशेषों को तलाशते और पुटनी में प्रागैतिहासिक अवशेषों को खोजते हुए देखा जा सकता है. उनके लिए इस काम का आनंद यह है कि कब कहां क्या मिल जाए इसका पता नहीं रहता.









नदी में ब्रिटेन का इतिहास





टेम्स नदी दुनिया की सबसे महान और बड़ी पुरातात्विक जगहों में से एक है. इसके किनारे से मिली चीज़ों के ज़रिये ब्रिटेन का पूरा इतिहास बताया जा सकता है.





लंदन म्यूज़ियम में रखी गई कई चीज़ें टेम्स से मिली हैं. नदी पर सरसरी निगाह दौड़ाएं तो वहां बर्तन, कांच और धातु के टुकड़े दिखते हैं.





कीचड़ से सामान बीनने वालों ने वहां से हाथी के विशाल दांत से लेकर रोमन लैंप और ट्यूडर की अंगूठी तक खोजे हैं.





पिछले कुछ साल से पुरातत्व में धन की कमी को देखते हुए शौकिया मडलार्क कीचड़ से नाज़ुक चीज़ों को निकालने और उनके संरक्षण में बड़े मददगार रहे हैं.





पोर्टेबल एंटिक्विटी स्कीम (PAS) के तहत अब तक 15 लाख पुरातात्विक खोजें दर्ज की गई हैं, जिनको ब्रिटेन की जनता ने ढूंढा है.









अवशेषों के रिकॉर्ड भी हैं





लंदन में मडलार्क द्वारा खोजे गए अवशेषों का आकलन करने और रिकॉर्ड रखने वाले PAS के अधिकारी स्टुअर्ट वायट कहते हैं, “लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक यह बहुत अहम है कि मडलार्क अपनी खोजों के बारे में हमें सूचित करें भले ही कोई चीज़ कितनी ही मामूली क्यों न लगे.”





“टेम्स छोटी पोर्टेबल खोजों के मामले में बहुत समृद्ध है. संख्या ही नहीं, गुणवत्ता के मामले में भी टेम्स से मिली चीज़ें बहुत अहम हैं.”





“शीशा, चमड़ा और हड्डियों की कलाकृतियों का संरक्षण विशेष रूप से अच्छा है, चाहे 17वीं सदी का बालों में लगाने वाला रोमन पिन हो या बच्चे का खिलौना.”





“ज़मीन पर होतीं तो ये कलाकृतियां जाने कब की खो गई होतीं, लेकिन टेम्स तट की खूबियों ने उनको संरक्षित करके रखा है.”





कीचड़ में खोजबीन जोखिम भरा शौक हो सकता है. जब-जब ज्वार आता है तो पानी बड़ी तेज़ी से आता है. आपको नदी तट से बाहर निकलने के रास्ते पर हमेशा नज़र बनाकर रखनी होती है.





एक तजुर्बेकार मडलार्क ने मुझे बताया था कि वह कीचड़ के बीच एक गड्ढे में गिर गए थे. संयोग से उनके पास एक बाल्टी थी जिसकी मदद से वह बाहर निकल गए.





लेकिन टेम्स के कीचड़ में उतरने के बहुत फायदे हैं. उसके विभिन्न स्तरों में लंदन के इतिहास के हर दौर के अवशेष मौजूद हैं.









जूं वाली कंघी





लिज़ एंडरसन एक मडलार्क हैं जो अपनी खोजों के बारे में एक ब्लॉग चलाती हैं. एक बार उनको कीचड़ से 2,000 साल पुरानी रोमन कंघी मिली थी.





वह कहती हैं, “यह कंघी बॉक्सवुड की बनी है. जो चीज़ मुझे सबसे अधिक पसंद है वह यह कि इस कंघी की डिज़ाइन हूबहू आज जैसी है.”





“इसके दांतों के बीच मिट्टी फंसी है. निश्चित रूप से उसमें रोमन जूं भी हो सकती हैं. जब यह मुझे मिली थी, तब यह इतनी अच्छी स्थिति में थी जैसे यह कल ही नदी में गिरी हो.”





टेम्स नदी शहर के बीच से बल खाती हुई गुज़रती है तो अनकही कहानियां लगातार सामने आती रहती हैं.





दक्षिण-पूर्ण लंदन में रोदरहाइथ के एक छोटे हिस्से में जहां दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के बमवर्षकों ने इमारतों को जमींदोज़ कर दिया था, वहां नदी में लाल ईंटें मिलती हैं.





उन ईंटों के साथ जंग खाई बेशुमार कीलें और जहाज़ों की प्लेटें मिलती हैं. ये उस समय की याद दिलाती हैं जब 19वीं सदी में रोदरहाइथ में जहाज़ तोड़े जाते थे.





पास में ही जेटी को सहारा देने वाले लकड़ी के खंभे हैं. क़रीब से देखने पर पता चलता है कि कुछ खंभे सबसे अलग हैं. बाहर से गलने की जगह वे अंदर से खोखले हैं. असल में ये व्हेल की पसलियां हैं.





1720 के दशक से ही मछलियां पकड़ने वाले जहाज़ ग्रीनलैंड डॉक तक आते थे जहां व्हेल की चर्बी से उपयोगी तेल निकाला जाता था.





व्हेल की हड्डियों से भी कई तरह के उत्पाद बनाए जाते थे. कभी-कभी इमारती लकड़ियों की कमी होने पर व्हेल की हड्डियों का भी इस्तेमाल कर लिया जाता था. ये सभी चीजें टेम्स में 100 मीटर के दायरे में ही हैं.





नदी के पास जाने की खुशी





एंडरसन नदी तट पर उतरकर प्रसन्न हो जाती हैं. “मैं परेशान करने वाली किसी भी चिंता या फ़िक्र को भूल जाती हूं.”





“यदि मुझे किसी दिन बहुत कुछ न भी मिले तो भी मुझे नदी की शांति अच्छी लगती है. वहां का जीवन, परिंदे, नावें, पानी की आवाज़, पानी पर प्रतिबिंबित होती रोशनी, टेम्स का बदलता परिदृश्य- यह सब मुझे पसंद है. ठंड या बारिश के दिन में यह बहुत स्फूर्ति देता है.”





फिर भी किसी सर्द सुबह जब तेज़ ठंडी हवाएं चल रही हों तब धूसर रंग की नदी के किनारे कुछ भी न ढूंढ पाने से निराशा तो होती ही है.





एक बार मुझे सिर्फ़ इस्तेमाल किए हुए कंडोम और एक पुराना बेल्ट मिला. लेकिन टेम्स में कुछ मिलने की आशा वापस खींचती है.





एंडरसन का ख़्वाब है कि टेम्स में उन्हें कभी नवपाषाण काल के चकमक पत्थर के औज़ार मिलें.





“सिक्के और दूसरी चीज़ें खोजना अच्छा है लेकिन पत्थर के औज़ार की बात ही कुछ और है. उसे हाथ में लेना कितना ख़ास लगेगा. उनमें से कुछ बहुत ख़ूबसूरती से तैयार किए गए हैं.”





मैक्लेम कुछ ऐसा तलाश रही हैं जिससे कोई कहानी जुड़ी हो. वह कहती हैं, “मेरा सपना मध्यकालीन सेंट थॉमस बेकेट तीर्थयात्रा बैज खोजना है.”





कैंटरबरी में बेकेट की समाधि पर भारी तादाद में ऐसे स्मृति चिह्न बनाए गए थे. मैक्लेम को लगता है कि किसी न किसी तीर्थयात्री की वह स्मारिका लंदन लौटते समय नदी में ज़रूर गिरी होगी.





आप जितनी ज़्यादा देर मडलार्क करते हैं आप उतनी ज़्यादा चीज़ें ढूंढना चाहते हैं. मैक्लेम मुझे सावधान करती हैं, “इसकी लत पड़ जाती है.”





“लेकिन लत तो लग चुकी है- भले ही अभी मैं टेम्स में सोने का ख़ज़ाना ढूंढने के ख्वाब देखती हूं.”


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